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PUBG Mobile makes announcement, ‘we are ready with India trailer’

Rohini Singh

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PUBG Mobile India Comeback and release date: Pubgmobile trailer might drop today? The game announced on their twitter handle that it’s coming soon, The PUBG fans’ wait finally came to an end with the unban and positive developments about the availability of the game in the country. PUBG Corporation announced that the game would soon make a comeback with a special Indian version.


A few days back, game multiple teasers for the upcoming Indian version of the game. These clips featured a few of the most prominent Indian influencers – Dynamo, Kronten, and Jonathan.These clips did not provide any insights into the game’s release date but did give the players reasons to celebrate.

PUBG earlier had announced that they are coming to India soon in a new avatar. Called the PUBG Mobile India, the battle royale game has been designed keeping India in mind. The game is yet to officially announce the exact date of the launch but all developments are indicating, India will soon be able to enjoy the game.

Meanwhile the India pre-registrations for Android and iOS have now opened for select users who are a part of Tap Tap game sharing community.

According to the said community announcement, a pre-registration can be done for ‘PUBG Mobile – India’ on the TapTap store. The pre-registrations are open for both Android and iOS platforms. Tap Tap has now listed the game with pre-registrations for its community members.

The app has already been registered by over 300,000 users and is currently rated 9.8/10.
But there is neither any official announcement by the Corporation or any of its affiliate on the authenticity of the said registration module. As we write, the game was not listed on Android and iOS app stores.

The entire community is confused about the authenticity of the PRE- Registration page ?

PUBG Mobile Pre Registration on TapTap Store – Is it authentic ?
Many users are left confused as there has been an official announcement made by PUBG Corporation regarding the pre-registrations of PUBG Mobile – India.

PUBG Mobile India unban and release date is getting a huge response from the gamer community registered on Tap Tap. At the time of writing, the latest version of the game received over 2 lakh pre-registrations. The description for this pre-registration listing also reveals the Facebook and YouTube pages for PUBG Mobile India are now live. In fact, the Facebook and Instagram pages of PUBG Mobile India have posted teasers of the game, saying it is “coming soon.” The Tap Tap listing also mentions the game will be available in both English and Hindi language.

But now the big question is – if game Pre-Registrations are for real and authentic, why company is not making any official announcement on it ?

According to some experts, the main reason could be that the Indian Government is yet to come out with their official stance on the Relaunch of the PUBG Mobile after unban.

As the ministry is yet to give green signal, the PUBG Corporation is reluctant to make any official statement on the comeback or unban other than the initial announcement”, according to the industry experts.

To comply with the local norms, the Corporation plans on establishing a local office where it will hire over 100 employees to enhance communications and services with players. “In addition to establishing a local office, the company will look to actively collaborate and leverage local businesses to strengthen its gaming service,” the developers added.

The Corporation and parent company Krafton are planning to make $100 million (approximately Rs. 746 crores) investments in India to “cultivate the local video game, e-sports, entertainment, and IT industries.” As of now, the team has not shared a comeback date for the game.

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क्या BJP के विस्तार में रोड़ा थे सुशील मोदी? पढ़ें पूरी जानकारी!

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क्या BJP के विस्तार में रोड़ा थे सुशील मोदी? पढ़ें पूरी जानकारी!

Rohini Singh

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सुशील कुमार मोदी पर डॉ. सीपी ठाकुर और ताराकांत झा जैसे BJP के दिग्‍गज नेताओं को भी दरकिनार करने का आरोप लगता रहा है. समय का चक्र ऐसा घूमा कि अब उन्‍हें ही खुद को दरकिनार करने का डर सताने लगा है.
लद्दाख में चीन से निपटने की भारत की तैयारी पूरी, आधुनिक बेड, गर्म घर तैयार
ताराकांत झा की चिंता की वजह ये थी कि उनकी विधान परिषद की सदस्यता समाप्त हो रही थी और पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया ।

असीमित सत्ता पतन का कारण होती है. बिहार भाजपा (Bihar BJP) में शक्ति के प्रतिष्ठान रहे सुशील मोदी (Sushil kumar Modi) को भी आखिरकार बेदखल होना पड़ा. वह नाखुश हैं कि उनके साथ बुरा हुआ. वह नाखुश हैं कि उनसे कुछ छीन लिया गया. तभी वह कह रहे हैं कि कार्यकर्ता का पद कोई नहीं छीन सकता. आखिर ऐसी क्या बात हुई कि सुशील मोदी का डिप्टी सीएम पद छिन गया? क्या वह भाजपा के विस्तार में रोड़ा अटका रहे थे? क्या सुशील मोदी की वजह से भाजपा नीतीश (Nitish kumar) की छाया से मुक्त नहीं हो पा रही थी? या फिर बिहार भाजपा में उनके खिलाफ गहरा असंतोष पनप गया था?

उत्थान के बाद पतन


सुशील मोदी बेशक बिहार भाजपा के बड़े नेता में शुमार रहे, लेकिन उन पर निरंकुशता और मनमानी का भी आरोप लगता रहा. सुशील मोदी ने कैसे प्रदेश संगठन पर वर्चस्व स्थापित किया? संघ के विद्वान प्रचारक रहे केएन गोविंदाचार्य जब भाजपा के संगठन महामंत्री थे, तब उन्होंने सुशील कुमार मोदी को बिहार भाजपा में आगे बढ़ाया था. साल 1990 में जब बिहार में लालू यादव का उदय हुआ तो इसकी काट में गोविंदाचार्य ने भाजपा में भी पिछड़ावाद को प्रमोट किया. इसे सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया गया. गोविंदाचार्य सुशील मोदी के संरक्षक बन गये. कहा जाता है कि वर्ष 1990 के विधानसभा चुनाव में सुशील मोदी को शुरू में पटना मध्य से टिकट नहीं मिला था, लेकिन गोविंदाचार्य के दखल के बाद उन्हें टिकट मिला और वह विधायक बने.

नीतीश कुमार को ही मजबूत किया

सुशील मोदी प्रतिभाशाली छात्र रहे थे. राजनीति में आने के बाद भी उनका स्वाध्याय जारी रहा. तर्क और तथ्यों पर आधारित उनकी राजनीतिक शैली ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. धीरे-धीरे वह भाजपा के एक लोकप्रिय नेता बन गये, लेकिन इस लोकप्रियता के बीच उन पर यह आरोप लगा कि वह पार्टी में असीमित शक्ति का केन्द्र बने गए हैं. जिन नेताओं के तेजी से उभरने का अंदेशा हुआ उसके पर कतर दिये गये. प्रदेश संगठन में सुशील मोदी के समर्थकों की संख्या इतनी अधिक हो गयी कि किसी दूसरे नेता के लिए पांव जमाना मुश्किल हो गया. सुशील मोदी के राजनीति संरक्षक रहे गोविंदाचार्य ने भाजपा में रह कर भी अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बड़े नेता को संघ का मुखौटा कहा था. इससे वाजपेयी इतने आहत हुए थे कि गोविंदाचार्य की भाजपा से ही छुट्टी हो गयी. इसी तरह सुशील मोदी पर आरोप है कि उन्होंने भाजपा में रह कर भी नीतीश कुमार को ही मजबूत किया.

चंद्रमोहन राय को स्वास्थ्य विभाग से हटा दिया गया
सुशील मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बिहार में भाजपा के किसी और नेता को उभरने नहीं दिया, ताकि वह एकमात्र विकल्प के रूप में स्थापित रहें. साल 2005 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की पहली सरकार बनी थी, तब भाजपा के चंद्रमोहन राय बिहार के स्वास्थ्य मंत्री थे. चंद्रमोहन राय ने अपनी लगन और मेहनत से स्वास्थ्य विभाग का कायापलट कर दिया था. उस समय नीतीश के सभी मंत्रियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन चंद्रमोहन राय का ही माना गया था. कहा जाता है कि चंद्रमोहन राय के बढ़ते कद से सुशील मोदी परेशान हो गये थे. जब 3 साल बाद नीतीश ने अचानक मंत्रिमंडल में फेरबदल किया तो चंद्रमोहन राय को स्वास्थ्य विभाग से हटा दिया गया.

RJD के वरिष्ठ नेता और बिहार की राजनीति की गंभीर समझ रखने वाले शिवानंद तिवारी भी चंद्रमोहन राय के प्रशंसक हैं. उन्होंने जुलाई 2020 में कहा था कि जब 2008 में चंद्रमोहन राय को स्वास्थ्य मंत्री के पद से हटाया गया था, तभी से इस विभाग के पतन की कहानी शुरू हो गयी थी. सुशील मोदी के कारण चंद्रमोहन राय ने आखिरकार साल 2014 में राजनीति से संन्यास ले लिया था. तब उन्होंने कहा था कि सुशील मोदी का बिहार भाजपा पर कब्जा हो गया है. कहा जाता है कि चंद्रमोहन राय को सवर्ण होने की कीमत चुकानी पड़ी.
सुशील मोदी बनाम सीपी ठाकुर

भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. सीपी ठाकुर साल 2010 में बिहार भाजपा के अध्यक्ष थे. जून 2010 में नीतीश ने भोज की थाली खींच कर लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं का अपमान किया था. तब इस मसले पर विचार करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ठाकुर को दिल्ली बुलाया गया. नितिन गडकरी तब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. उस समय भाजपा के कई नेता नीतीश कुमार से गठबंधन तोड़ने के पक्ष में थे, लेकिन सुशील मोदी और कुछ अन्य नेता नीतीश से मेल बनाये रखने के हिमायती थे. चार महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने थे. इसलिए इस मामले को तूल नहीं दिया गया. अक्टूबर 2010 में जब विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा में टिकट वितरण होने लगा तो फिर विवाद पैदा हो गया.
प्रदेश अध्यक्ष सीपी ठाकुर ने टिकट वितरण में अपनी उपेक्षा का आरोप लगा कर पद से इस्तीफा दे दिया. डॉ. ठाकुर के समर्थकों का आरोप था कि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के इशारे पर ऐसा किया गया. डॉ. ठाकुर ने विक्रम और बेगूसराय में भाजपा उम्मीदवार के बदलने की मांग रख दी. ऐन चुनाव के पहले दिग्गज नेता सी पी ठाकुर के इस्तीफा देने से भाजपा में भूचाल आ गया. पटना से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. नितिन गडकरी ने जब खुद डॉ. ठाकुर को मनाया तब जा कर उन्होंने इस्तीफा वापस लिया. लेकिन, इसके बाद भी दोनों के बीच पटरी नहीं बैठी. सीपी ठाकुर भी भाजपा का सवर्ण चेहरा हैं.
सुशील मोदी बनाम ताराकांत झा

विद्वान वकील और प्रखर नेता ताराकांत झा विषम परिस्थितियों में बिहार भाजपा के अध्यक्ष बने थे. साल 1990 के चुनाव में भाजपा के 39 विधायक चुने गये थे. उस समय बिहार भाजपा में गुटबाजी चरम पर थी. बड़े नेता एक-दूसरे को पछाड़ने में लगे हुए थे. 9 मार्च 1990 को तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने इस्तीफा दे दिया. नामधारी, समरेश सिंह समेत भाजपा के कई नेताओं को निलंबित कर दिया गया. भाजपा विधायक दल में विद्रोह हो गया. ललित उरांव को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया. इन विकट परिस्थितियों में ताराकांत झा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. ताराकांत झा गहरी सूझवूझ वाले मजबूत नेता थे. साल 2009 में वह बिहार विधानपरिषद के सभापति चुने गये थे.
ताराकांत झा की परेशानी

अप्रैल 2012 की बात है. उस समय बिहार विधानपरिषद की 100वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रमों का अंतिम दौर चल रहा था. एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पटना आये हुए थे. मंच पर उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और विधानपरिषद के सभापति ताराकांत झा मौजूद थे. विधानपरिषद का सभापति होने के कारण ताराकांत झा के लिए यह एक यादगार लम्हा था, लेकिन तब वह बहुत परेशान दिख रहे थे. उन्होंने जैसे-तैसे कार्यक्रम को सम्पन्न कराया.
दिग्‍गज नेता को भी नहीं बख्‍शा

ताराकांत झा की चिंता की वजह यह थी कि उनकी विधानपरिषद की सदस्यता समाप्त हो रही थी और पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया था. आरोप था कि सुशील मोदी के इशारे पर उनका टिकट काट दिया गया था. ताराकांत झा ने कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बाद उनके साथ ऐसा छल किया जाएगा. विधानपरिषद के लिए 11 सीटें खाली हुई थीं. नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने खुद पर्चा दाखिल कर दिया था, लेकिन उनकी उपेक्षा कर दी गयी. इस अपमान से आहत ताराकांत झा ने 2014 में भाजपा छोड़ कर जदयू ज्वाइन कर लिया था. तब उन्होंने आरोप लगाया था कि सुशील मोदी से दिक्कत थी, इसलिए उन्होंने पार्टी बदल ली. ताराकांत झा भाजपा के संस्थापक नेताओं में एक थे, मगर उनका आखिरी समय अप्रिय स्थितियों में गुजरा. जदयू में जाने के तीन महीने बाद मई 2014 में ही उनका निधन हो गया

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राष्ट्रीय गान भी पूरा नहीं गा सके बिहार के शिक्षा मंत्री मेवा लाल चौधरी, राजद ने शेयर किया वीडियो!

Rohini Singh

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अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर मंत्री डॉ. चौधरी मीडिया के सामने बोलने से बच रहे हैं। हर सवाल पर वह एक ही बात बोलते हैं कि इसको छोड़िए, विकास की बातें करें।


मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाया गया है।
बिहार में नीतीश कुमार की सरकार के बनते ही विवाद शुरू हो गया। ताजा मामला मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर है। पहली बार मंत्री बनाए गए डॉ. मेवालाल चौधरी एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान गा रहे हैं, लेकिन वह उसे पूरा नहीं बोल सके। राष्ट्रीय जनता दल ने इस कार्यक्रम का एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है। उसमें यह साफ-साफ दिख रहा है। डॉ. मेवालाल चौधरी को सीएम नीतीश कुमार ने शिक्षा जैसा अहम विभाग सौंपा है।



खास बात यह है कि डॉ. मेवालाल चौधरी पहले भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं और उन पर अपने कार्यकाल के दौरान 2012 में 161 सहायक प्राध्यापक-जूनियर साइंटिस्ट के पदों पर हुई बहाली में बड़े पैमाने पर धांधली और पैसों के लेन-देन के आरोप लग चुके हैं। इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। बाद में उन्होंने कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी।

राष्ट्रीय जनता दल ने उनको शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाया है। आरजेडी ने ट्वीट कर कहा, ‘जिस भ्रष्टाचारी MLA को सुशील मोदी खोज रहे थे, उसे नीतीश ने मंत्री बना दिया।’ इस मामले में जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि डॉ. चौधरी के केस में हाई कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। ऐसे में उन पर सवाल उठाना उचित नहीं है। कहा कि कुशवाहा बिरादरी ने उनको वोट दिया, इसलिए विपक्ष उनको निशाना बना रहा है। डॉ. मेवालाल चौधरी कुइरी समाज के है।


नीतीश के मंत्री से पूछा उनके भ्रष्टाचार पर सवाल तो बोले- ये सब छोड़िए, विकास की बात कीजिए
यूनिवर्सिटी में वीसी रहते लगा था बहाली में धांधली का आरोप, जाने कौन हैं मंत्री पद की शपथ लेने वाले मेवा लाल चौधरी

अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर मंत्री डॉ. चौधरी मीडिया के सामने बोलने से बच रहे हैं। हर सवाल पर वह एक ही बात बोलते हैं कि इसको छोड़िए, विकास की बातें करें। राज्य के डिवलपमेंट पर सवाल करिए। आरजेडी समेत विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मा्ंग रही हैं। वीडियो में डॉ. मेवालाल चौधरी के राष्ट्रगान पूरा नहीं पढ़ पाने पर आरजेडी ने ट्वीट किया है कि “भ्रष्टाचार के अनेक मामलों के आरोपी बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी को राष्ट्रगान भी नहीं आता। नीतीश कुमार जी शर्म बची है क्या? अंतरात्मा कहाँ डुबा दी?”

डॉ. मेवालाल चौधरी तारापुर प्रखंड के कमरगांव गांव के रहने वाले है। कुलपति पद से रिटायर होने के बाद वर्ष 2015 में वह जदयू से टिकट लेकर तारापुर से चुनाव लड़े और जीत गए।

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देखें कौन सा पद किसको मिला है, दो दो उपमुख्यमंत्री, नितीश कुमार ने खुद रख गृह मंत्रालय!

Rohini Singh

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बिहार में विभागों का बंटवारा: नीतीश ने गृह मंत्रालय अपने पास रखा, तारकिशोर प्रसाद को मिले सुशील मोदी वाले विभाग।उपमुख्यमंत्री रेणु देवी को महिला विकास मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है. वहीं, विजय चौधरी को ग्रामीण विकास, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्रालय दिया गया है।

पटना: बिहार में जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की अगुवाई में एनडीए (NDA) की सरकार बन गई है. नीतीश कुमार और दो उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी समेत अन्य मंत्रियों ने सोमवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद मंगलवार को विभागों का बंटवारा कर दिया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले की तरह गृह मंत्रालय अपने पास रखा है. उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tarkishore Prasad) को सुशील मोदी (Sushil Modi) के पास के सभी मंत्रालय दिए गए हैं, जिसमें वित विभाग भी शामिल है. 

वहीं, उपमुख्यमंत्री रेणु देवी को पंचायती राज विभाग का जिम्मा सौंपा गया है. विजय चौधरी को ग्रामीण विकास, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्रालय दिया गया है. जेडीयू कोटे से आने वाले अशोक चौधरी को भवन निर्माण और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बनाया गया है. मेवालाल चौधरी शिक्षा मंत्री होंगे. मंगल पांडेय को स्वास्थ्य और पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है.

देखिए किसको मिला कौन-सा विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार- गृह, सामान्य प्रशासन, कैबिनेट, विजिलेंस. किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए मंत्रालय.

तारकिशोर प्रसाद- वित्त, वाणिज्यिक कर, पर्यावरण एवं वन, सूचना प्रौद्योगिकी, आपदा प्रबंधन, शहरी विकास विभाग.  

रेणु देवी- पंचायती राज,  पिछड़ी जाति का उत्थान एवं ईबीसी कल्याण, उद्योग. 

विजय चौधरी- ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, जल संसाधन, सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य बिजेंद्र यादव- ऊर्जा, निषेध, योजना, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले का मंत्रालय.

मेवालाल चौधरी- शीला कुमारी- परिवहन

संतोष मांझी- लघु सिंचाई, SC/ST कल्याण मुकेश साहनी- पशुपालन एवं मत्स्य पालन

मंगल पांडे- स्वास्थ्य, सड़क और कला एवं संस्कृति विभाग

अमरेंद्र सिंह- कृषि, सहकारी और गन्ना विभाग

रामप्रीत पासवान- पीएचईडी

जीवेश कुमार- पर्यटन, श्रम और खान विभाग

राम सूरत- राजस्व और कानून मंत्रालय

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